ओवैसी ने बताया कि वोटर सूची से बाहर किए गए लोगों को कल्याण लाभों से वंचित करना गलत है

नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में कहा कि सरकार द्वारा चलाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाएं सभी योग्य नागरिकों के लिए हैं और इन्हें वोटर रजिस्ट्रेशन से जोड़ा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कई जिलों में वोटर सूची से बाहर किए गए लोगों को सरकारी लाभों से वंचित किए जाने की निंदा की।
ओवैसी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां न केवल लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं बल्कि वे समाज के गरीब और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के हितों के खिलाफ भी हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे जनहित के इन कार्यक्रमों को जाति, धर्म या वोटर सूची के आधार पर सीमित न करें। उनका यह भी मानना है कि कल्याणकारी योजनाओं को उन सभी तक पहुँचाना चाहिए जो वास्तव में इसके अधिकारदार हैं, चाहे वे वोटिंग लिस्ट में हों या नहीं।
उन्होंने बताया कि वोटर सूची से नाम हटाने या न जोड़ पाने का मतलब यह कतई नहीं कि वे लोग किसी सरकारी सहायता से वंचित रहेंगे। ‘‘सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह सभी योग्य नागरिकों को उनके हक दिलाए और किसी भी प्रकार के भेदभाव से बचें।’’, ओवैसी ने कहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार परिवीक्षा और सरकारी अभिलेखों में खामियों के कारण भी लोगों का नाम वोटर सूची से बाहर रह जाता है। ऐसे में अगर उन लोगों को कल्याण लाभों से वंचित किया जाता है तो यह अनुचित होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों ने भी ओवैसी के इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि सरकारों को अपने सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क को और अधिक समावेशी बनाना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से जूझ रहा है, और वोटर सूची के विवादों ने कई इलाकों में गर्मागर्म बहस को जन्म दिया है। ओवैसी ने कहा कि ‘‘वोटर सूची से बाहर होना किसी भी नागरिक की योग्यता को कम नहीं करता, और न ही वे कल्याणकारी योजनाओं के अधिकारों से वंचित हो सकते हैं।’’
समाज के विभिन्न वर्गों के हित में यह आवश्यक है कि सरकार इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करे और प्रत्येक योग्य व्यक्ति तक लाभ पहुंचाए। इस पर सरकारी विभागों को भी ध्यान देना होगा कि वे बाधाओं को खत्म कर ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में सहायता पहुंचाएं।
ओवैसी ने आगे कहा कि यदि वोटर सूची में नाम न होने के कारण योजनाओं से वंचित लोग हैं, तो इसके लिए भी सरकार को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम लोकतंत्र की मजबूती चाहते हैं, जिसमें प्रत्येक नागरिक समानता के साथ खुद को जुड़े हुए महसूस करे।’’ यह अपील सामाजिक न्याय और समावेशन की भावना को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं जैसे कि जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, खाद्यान्न वितरण आदि, गरीबों और पिछड़े वर्गों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए बनाई गई हैं। इन योजनाओं का लाभ लेने में किसी भी प्रकार की बाधा उचित नहीं। इससे जुड़ी नीति बनाने वालों को यह बात समझनी जरूरी है कि वोटर सूची के आधार पर लाभ का इंकार संविधान और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत होगा।
असदुद्दीन ओवैसी के इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। आने वाले समय में सरकार की ओर से इस विषय पर क्या स्पष्ट रणनीति बनती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।






