
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के खिलाफ अपनी आवाज उठाने वाले वेदांत श्रीवास्तव, निसर्गा अधिकारी और सार्थक सिद्धांत नामक तीन छात्र आखिरकार न्याय की जीत हासिल कर चुके हैं। इस प्रणाली की गलतियों को लेकर जब ये युवा सार्वजनिक मंचों पर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कर रहे थे, तब उन्हें ऑनलाइन नफरत फैलाने वालों का भी सामना करना पड़ा। हालांकि बोर्ड ने बाद में अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए इसे सुधारने का वादा किया है।
CBSE ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को 2018 में लागू किया था, जिसका उद्देश्य छात्रों की परीक्षाओं का मूल्यांकन अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाना था। लेकिन इसे लेकर कई तकनीकी और मानव त्रुटियाँ सामने आईं, जिनका सामना मुख्य रूप से परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को करना पड़ा। इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने वाले तीनों छात्रों ने सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों पर इस समस्या पर सवाल उठाए।
वेदांत, निसर्गा और सार्थक ऐसी आवाज बने जो बोर्ड की गलतियों को समझाना और सुधारना चाहते थे। परन्तु इसके जवाब में उन्हें सोशल मीडिया पर क्रूर ट्रोलिंग और नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। ऐसे में भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी बात को मजबूती से रखा।
आखिरकार केंद्र सरकार के अधीन आने वाले CBSE ने जांच कर स्वीकार किया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग में कुछ नियामक और प्रणालीगत कमियाँ थीं। बोर्ड के अधिकारियों ने बयान दिया कि वे इस नई तकनीक को और अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने के लिए कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलतियाँ दोबारा नहीं होंगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यह छात्रों और समाज की जागरूकता का परिणाम है कि शिक्षा बोर्ड ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की। यह घटना डिजिटल युग में छात्रों की भागीदारी और उनकी आवाज़ को महत्व देने का एक उदाहरण भी साबित हुई है।
अब यह तीनों छात्र अपनी जीत पर संतुष्ट हैं, परन्तु उनका मानना है कि शिक्षा तंत्र लगातार सुधार की प्रक्रिया में रहना चाहिए। वे सभी छात्रों से अपील करते हैं कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग और सक्रिय रहें ताकि शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे।
शिक्षा विशेषज्ञ भी इस मामले को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य में छात्रों और बोर्ड के बीच बेहतर संवाद को जन्म देगा। CBSE की तरफ से इस घटना से मिली सीख का विस्तार से विश्लेषण करना और आवश्यक सुधार अंततः सिस्टम की मजबूती के लिए आवश्यक है।
इस प्रकार, वेदांत श्रीवास्तव, निसर्गा अधिकारी और सार्थक सिद्धांत की हिम्मत और लगन ने एक बड़ी लड़ाई में बोर्ड के समक्ष मुद्दे को रखा और अंततः उन्हें न्याय मिला। यह कहानी न केवल तीन छात्रों की है, बल्कि पूरे राष्ट्रीय शिक्षा तंत्र के सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।






