गर्मी की लहरों के बढ़ने से भारत के आशा कार्यकर्ता भुगत रहे हैं भारी कीमत

उत्तरी भारत में बढ़ती गर्मी की लहरों के बीच, यूपी से हरियाणा तक काम कर रहे फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स अपनी जान हथेली पर लेकर सेवा दे रहे हैं। हल्की मजदूरी, वेतन में लगातार देरी और सुरक्षा की कमी ने इन आशा कार्यकर्ताओं की परेशानी को और भी बढ़ा दिया है।
देश में जब तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रहा है, तो इन कर्मचारियों का कहना है कि वे भीषण गर्मी और थकान के कारण बीमार पड़ रहे हैं। बावजूद इसके, वे अपने कर्तव्य से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाएं देते हैं, टीका लगाते हैं और महामारी की रोकथाम के लिए जागरूकता फैलाते हैं। लेकिन इन्हें न केवल उचित सुरक्षा उपकरणों की कमी का सामना करना पड़ता है, बल्कि उनका वेतन भी कई महीने बाद मिलता है या भुगतान असंगत रहता है।
एक आशा वर्कर ने बताया, “गर्मी में घर के बाहर कई घंटे काम करना इतना मुश्किल हो गया है कि कई साथियों को हसन आ जाने या बीमार पड़ने की शिकायत होती है। हमारा वेतन भी समय पर नहीं मिलता, जिससे आर्थिक तंगी बढ़ जाती है।”
राज्य सरकारों से मांग की जा रही है कि वे इन फ्रंटलाइन श्रमिकों की सुरक्षा, बेहतर वेतन और समय पर भुगतान सुनिश्चित करें ताकि वे बिना किसी डर के अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सेवा कर सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस समस्या को नजरअंदाज किया गया, तो स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को नुकसान हो सकता है, क्योंकि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ की हड्डी के रूप में काम करते हैं।
गर्मी की तीव्रता के साथ ही इनके लिए विश्राम और हेल्थ चेकअप की व्यवस्था जरूरी हो गई है। साथ ही, उन्हें जरूरी सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि कोरोना जैसे महामारी के खतरे से बचा जा सके।
सरकार ने कहा है कि वे आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द समाधान निकालने के प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इन कार्यकर्ताओं का मानना है कि अब समय आ गया है कि उनकी आवाज पर ध्यान दिया जाए और उन्हें उचित सम्मान और सुविधा दी जाए।






