उत्तर प्रदेश

तिरुवरूर कलेक्टर स्तब्ध, सरकारी स्कूल में कक्षा बारह की छात्राएं फर्श पर बैठी देखी गईं

तिरुवरूर जिले के एक सरकारी स्कूल की कक्षा बारहवीं की छात्राओं को फर्श पर बैठा देखकर तिरुवरूर कलेक्टर ने गहरा आश्चर्य व्यक्त किया। यह घटना शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और छात्रों के लिए सुविधाओं की कमी को उजागर करती है, जो स्थानीय प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गई है।

तिरुवरूर कलेक्टर ने सोमवार को स्कूल का औचक निरीक्षण किया था, जहां उन्होंने देखा कि कक्षा बारहवीं की छात्राएं उचित कुर्सियां या डेस्क न मिलने के कारण फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रही थीं। इस दृश्य को देखकर कलेक्टर काफी परेशान हुए और उन्होंने तुरंत कर्मचारियों से इस स्थिति को सुधारने का निर्देश दिया।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य सुविधाओं का अभाव लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा रहा है। पुरानी और टूटी-फूटी कुर्सियां, सफाई की समस्या, और यहां तक कि कक्षा में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का न होना, छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित करता है। तिरुवरूर कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए ये छोटी-छोटी समस्याएं बड़ी बाधा बन रही हैं।

स्कूल के प्रधानाचार्य ने भी इस मुद्दे को स्वीकार करते हुए कहा कि बजट की कमी और संसाधनों की अपर्याप्तता के कारण वे पूरी तरह से सुविधाएं प्रदान नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन से मिलने वाले निर्देशों और समर्थन से स्थिति में जल्द ही सुधार होगा।

इस कार्यक्रम के दौरान, कलेक्टर ने स्थानीय अधिकारियों और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे छात्रों के लिए उचित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि वे सम्मानपूर्ण और आरामदायक माहौल में अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि सही वातावरण में सीखने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।

स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता प्रकट की है। उनका कहना है कि बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए सरकार को स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं में सुधार करना जरूरी है। वे मांग कर रहे हैं कि तिरुवरूर के सभी सरकारी स्कूलों में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, साफ-सफाई, और अन्य छात्रावश्यक सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं।

ज्ञातव्य है कि तिरुवरूर जिले में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीन स्तर पर इन योजनाओं का सही क्रियान्वयन अभी चुनौतीपूर्ण प्रतीत हो रहा है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तिरुवरूर कलेक्टर ने आगे स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे की गंभीरता से समीक्षा करेंगे और आवश्यक धनराशि का प्रावधान कर जल्द से जल्द छात्राओं की बैठने की समस्या दूर करेंगे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और शिक्षकों से भी इस दिशा में पूरी सक्रियता बरतने का आग्रह किया।

यह मामला न केवल तिरुवरूर के लिए बल्कि पूरे राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुविधाओं के स्तर को लेकर एक चेतावनी का संकेत है। बेहतर शिक्षा के लिए छात्राओं की प्राथमिक जरूरतों का पूरा ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे बिना किसी असुविधा के पढ़ाई कर सकें और भविष्य में अपने सपनों को पूरा कर पाएं।

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