NFHS-6 ने पोषण चुनौतियों के बीच प्रगति का खुलासा किया

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: भारत में बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के बावजूद पोषण संबंधी समस्याएं जारी हैं, यह तथ्य हाल ही में प्रकाशित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की रिपोर्ट से सामने आया है। इस सर्वेक्षण ने देश में पोषण सुधार की दिशा में हुई प्रगति को दिखाया है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया है कि केवल स्वास्थ्य देखभाल में सुधार से ही पोषण संकट का समाधान नहीं हो सकता।
रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में कुपोषण की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है, खासकर ग्रामीण इलाकों और गरीब परिवारों में। इस समस्या के पीछे कई जटिल कारण हैं, जिनमें खराब आहार, स्वच्छता की कमी, महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक स्थिति शामिल हैं। बेहतर स्वास्थ्य केंद्र और अस्पताल बच्चों की देखभाल के लिए आवश्यक हैं, लेकिन पोषण के मुद्दे के लिए यह पर्याप्त नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण सुधार के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा जिसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना, महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक-आर्थिक कारकों को संबोध्ना आवश्यक होगा। उदाहरण के तौर पर, माताओं की शिक्षा स्तर बढ़ाने से बच्चों के पोषण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि शिक्षित माताएं बेहतर पोषण संबंधी निर्णय ले पाती हैं।
सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, अन्नपूर्णा योजना और राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan) इस दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन इनके प्रभावी लाभ के लिए जागरूकता और बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है। विशेषज्ञ ये भी कहते हैं कि पौष्टिक आहार की उपलब्धता और affordability भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे केवल स्वास्थ्य सेवाओं के सुधरने से दूर नहीं किया जा सकता।
अंततः, रिपोर्ट यह संदेश देती है कि भारत को अपने पोषण संकट से उबरने के लिए समग्र और सतत् प्रयास करने होंगे, जिनमें स्वास्थ्य सेवा सुधारों के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक पहल भी शामिल हों। तभी हम बेहतर स्वास्थ और पोषण के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे और देश में खुशहाली बढ़ा सकेंगे।






