
देश के तत्कालीन समय में शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना सरकार की एक प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में बताया कि राज्य सरकार की फीज-माफी योजना ने उच्च शिक्षा में छात्रों के लिए पढ़ाई में रुकावट को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत लगभग 1.85 लाख स्नातक छात्र लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे उनके आर्थिक बोझ में भारी कमी आई है। ऐसा करने से न केवल छात्रों के बीच शिक्षा का आवागमन बना रहता है, बल्कि उन्होंने आगे की पढ़ाई में भी निरंतरता सुनिश्चित की है।
हिमंता सरमा ने आगे बताया कि सरकार की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता और सुलभता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके अंतर्गत उन छात्रों को फीस में छूट दी जा रही है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में यह कदम प्रदेश के युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानना जा रहा है।
सरकार की इस योजना से स्नातक स्तर की पढ़ाई अधिक छात्रों के लिए सुलभ हुई है, जिससे dropout रेट में कमी आई है और छात्रों का मनोबल बढ़ा है। यह पहल न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करती है।
राज्य शैक्षिक विभाग के अधिकारीयों का कहना है कि फीज-माफी योजना को सरल और पारदर्शी तरीके से लागू किया गया है ताकि अधिक से अधिक योग्य छात्र इसका लाभ उठा सकें। इससे शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में सकारात्मक वृद्धि देखी गई है।
असम सरकार की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर भी सराही जा रही है, क्योंकि शिक्षा में समान अवसर प्रदान करने की यह एक सफल मिसाल है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सभी विद्यार्थियों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपनी पढ़ाई में उत्कृष्टता प्राप्त करें।
सरकार की इस योजना से जुड़े लाभार्थियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास जारी रहेंगे। यह कदम राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।






