रूपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 31 पैसे की तेजी के साथ 94.24 पर पहुंचा

भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुबह के शुरुआती कारोबार में 31 पैसे की तेजी के साथ 94.24 पर पहुंच गया। यह वृद्धि घरेलू इक्विटी बाजार में सकारात्मक रुझान और अमेरिकी मुद्रा के कमजोर होने के कारण हुई।
विदेशी मुद्रा व्यापारी बताते हैं कि स्थानीय इकाई रुपया घरेलू बाजार में बढ़ती उम्मीदों और निवेशकों के बेहतर मनोबल से लाभान्वित हुई। साथ ही, कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी रुपया को मजबूती प्रदान की। हालांकि, भारी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FII) की निकासी ने रुपया की तेजी में तेज उछाल को रोक दिया।
राजधानी दिल्ली स्थित एक फॉरेक्स ट्रेडर ने कहा, “जबकि घरेलू बाजार में सकारात्मक माहौल रुपया समर्थित कर रहा है, विदेशी निवेशकों की बाजार से बड़ी मात्रा में निकासी ने रुपया की मजबूत बढ़त पर नियंत्रण रखा है।”
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा जारी निकासी से संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है, जो भारतीय मुद्रा को प्रभावित कर रही है। इस तरह की निकासी का असर स्टॉक मार्केट और मुद्रा बाजार दोनों पर पड़ता है, जिससे निवेशकों की सावधानी बढ़ जाती है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अगर विदेशी निवेशक निकासी जारी रहती है तो रुपये की मजबूती पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, घरेलू आर्थिक सुधारों और मजबूत प्रदर्शन से अंततः रुपया फिर से मजबूती की ओर बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में डॉलर की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतक और भारत के आर्थिक आंकड़े रुपये के अगले रुख को तय करेंगे। निवेशक वर्तमान स्थिति को देखते हुए सतर्क हैं और बाजार की हरकत पर नजर बनाए हुए हैं।
इतना ही नहीं, विस्तार से देखें तो घरेलू इक्विटी बाजार में बढ़त से निवेशक की भरोसा बढ़ा है, जिससे रुपया भी स्थिर और मजबूत हुआ है। परंतु विदेशी निवेश में आई कमी ने रुपये की तेजी को सीमित रखा है। बाजार में इस संतुलन को लेकर निरंतर निगरानी आवश्यक होगी।






