डिजिटल युग के भारत के घरेलू रसोइये

नई दिल्ली। घरेलू सहायकों की दुनिया में एक नई क्रांति आयी है। जहाँ पहले परिवारों की पारंपरिक रेसिपी ही महत्वपूर्ण मानी जाती थीं, आज के डिजिटल युग में वीडियो लिंक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे यूट्यूब और रील्स ने उनकी पाक कला को वैश्विक रंग दिया है। कोचिंग से लेकर नई तकनीकें सीखने तक, घरेलू रसोइये अब अपनी काबिलियत बढ़ा कर बेहतर वेतन की मांग कर रहे हैं।
पूर्व में घर के कामकाज में महिलाएं केवल परिवार के संदर्भ में खाना बनाना सीखती थीं, लेकिन अब डिजिटल मीडिया की मदद से वे विदेशी व्यंजन जैसे इटालियन, थाई, जापानी और मेक्सिकन फ्लेवर्स को आसानी से समझकर पकाने लगी हैं। इस बदलाव के कारण न केवल उनकी पाक कला में वृद्धि हुई है, बल्कि वे नियोक्ताओं के लिए अधिक मूल्यवान भी बन गई हैं।
कुछ घरेलू सहायकों ने बताया कि वे वीडियो ट्यूटोरियल देखकर नयी विधियाँ सीखते हैं और आवश्यकताअनुसार अपने कौशल को अपडेट करते हैं। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि वे परिवारों से बेहतर वेतन और अतिरिक्त सुविधाएं मांगने में सक्षम हुए हैं।
किसी एक घरेलू रसोईये, रितु वर्मा ने कहा, “मैं पहले केवल पारंपरिक भारतीय व्यंजन बनाती थी, लेकिन अब मैं फ्रेंच और कोरियन व्यंजन भी बना सकती हूँ। यह परिवर्तन मेरी आमदनी में सुधार लाया है और नियोक्ता भी मेरी नई योग्यता की कद्र करने लगे हैं।”
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में घरेलू कार्यकर्ताओं का यह नया रुजान रोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इससे न केवल उनकी सामाजिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि घरेलू सेवाओं का स्तर भी बेहतर होगा।
सरकार और विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा भी इन घरेलू सहायकों के कौशल विकास के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य उन्हें तकनीकी ज्ञान देना और घरेलू उद्योग के मानक को ऊँचा उठाना है।
समय के साथ-साथ यह स्पष्ट हो रहा है कि घरेलू सहायक सिर्फ घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे बहुमुखी प्रतिभा वाले व्यावसायिक रसोइये भी बन सकते हैं। इस बदलाव ने घरेलू नौकरशाही में एक नई उम्मीद और प्रेरणा जगाई है, जो आगे चलकर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी।






