तकनीकशिक्षा

महाराष्ट्र मंत्री ने निजी तौर पर स्वीकार किया कि उन्हें टीईटी परीक्षा के प्रश्न पत्र आगरा में मुद्रित होने की जानकारी नहीं थी, बोले भाजपा विधायक

मुंबई। महाराष्ट्र के राज्य स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के प्रश्न पत्रों के आगरा में मुद्रित होने की जानकारी न होने का खुलासा हाल ही में हुआ है। इस मामले ने स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ी गंभीरता से सवाल उठाए हैं। पूर्व मंत्री सुधीर मुंगंटीवार ने इस घटनाक्रम को गंभीर लापरवाही करार दिया है और सभी राज्य स्तरीय परीक्षाओं की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है।

हालांकि शिक्षा मंत्री ने इस बात को निजी तौर पर स्वीकार किया है, जिसे भाजपा विधायक ने सार्वजनिक किया। यह मामला तब सामने आया जब टीईटी परीक्षा के पेपर प्रिंटिंग केंद्रों की जांच की गई। आगरा में पेपर मुद्रण का तथ्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों के संज्ञान से बाहर रहा, जो इस पूरे तंत्र में सुरक्षा एवं गोपनीयता के अभाव को दर्शाता है।

पूर्व मंत्री सुधीर मुंगंटीवार ने कहा, “यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों को तक ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं थी। यह राज्य स्तर की सभी परीक्षाओं के नियंत्रण और प्रबंधन की पुनः समीक्षा का विषय हो सकता है।” उन्होंने विभाग की कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की भी मांग की है।

शिक्षा मंत्रियों के इस अप्रत्याशित खुलासे के बाद प्रश्न उठता है कि परीक्षा सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले प्रावधान और प्रक्रिया कितनी प्रभावी हैं। वर्तमान में सरकारी परीक्षा व्यवस्था में पेपर की सुरक्षा से लेकर उनके वितरण तक के जिम्मेदार अनेक चरण होते हैं, जिनमें किसी भी तरह की चूक परीक्षा की विश्वसनीयता को कम कर सकती है।

वहीँ, शिक्षक पात्रता परीक्षा में जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा और महत्व को देखते हुए ऐसे लापरवाही पूर्ण प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा उनके कैरियर के लिए बेहद अहम है और इससे जुड़ी किसी भी अनियमितता से उनमें निराशा उत्पन्न हो सकती है।

इस पूरे प्रकरण ने स्कूल शिक्षा विभाग में निरीक्षण, सुरक्षा और प्रक्रिया सुधार की जरूरत को सामने रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के पेपर की मुद्रण और वितरण के कार्य का कड़ाई से ऑडिट होना चाहिए और उसमें पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पुख्ता कदम उठाए जाने चाहिए। इससे विभाग में विश्वसनीयता बनी रहेगी और आगामी परीक्षाओं में किसी प्रकार की अनियमितता से बचा जा सकेगा।

इस घटनाक्रम के बाद सरकार से उम्मीद की जाती है कि वे शीघ्र प्रभावी जांच करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ परीक्षा संचालन प्रणाली में सुधार करें। इससे न केवल शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में सुधार होगा, बल्कि समाज में शिक्षा प्रणाली के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।

सरकार के इस दिशा में उठाए गए कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं, ताकि आने वाले समय में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो सके और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बन सके।

Source

Related Articles

Back to top button