सुपरटेक के पूर्व प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, संदिग्ध लेन-देन पर उठाए सवाल; फर्जी स्टाम्प पेपर मामले की भी होगी जांच

नई दिल्ली, दिल्ली
दिवालिया हो चुकी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक के पूर्व प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कंपनी से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रबंधन के कथित संदिग्ध लेन-देन पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि इन्हें रद्द क्यों न घोषित कर दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित लेन-देन को निरस्त करने पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की संपत्तियों के हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने विशेष रूप से उस मामले पर चिंता जताई, जिसमें कथित तौर पर फर्जी स्टाम्प पेपर के जरिए संपत्ति ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों की गहन जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं कंपनी की संपत्तियों को गलत तरीके से स्थानांतरित तो नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सुपरटेक के हजारों घर खरीदार लंबे समय से अपने फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कंपनी की वित्तीय स्थिति और कथित अनियमितताओं के कारण परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। अदालत ने खरीदारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि सुपरटेक की 30 अधूरी हाउसिंग परियोजनाओं में से 16 परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी एनबीसीसी (NBCC) को सौंपी गई है। इसका उद्देश्य वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे खरीदारों को जल्द राहत देना है। हालांकि, अदालत ने इस दौरान यह भी उल्लेख किया कि कई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हो सकता है।
सुनवाई के दौरान सुपरटेक के ट्विन टावर मामले का भी जिक्र हुआ। अदालत ने कहा कि टावर गिराए जाने के बाद जिन खरीदारों को रिफंड दिया जाना था, उससे जुड़े मामलों में भी वित्तीय संसाधनों की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। न्यायालय ने इस पूरी स्थिति पर गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि कंपनी के वित्तीय प्रबंधन और संपत्तियों के लेन-देन की विस्तृत जांच जरूरी है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां आने वाले समय में सुपरटेक के पूर्व प्रबंधन के लिए मुश्किलें और बढ़ा सकती हैं। यदि जांच एजेंसियों को संदिग्ध लेन-देन और फर्जी दस्तावेजों के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अदालत का कहना है कि उसका प्रमुख उद्देश्य घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी की संपत्तियों का किसी भी प्रकार से गलत इस्तेमाल न हो। आने वाली सुनवाई में इस मामले पर आगे की कार्रवाई और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए जा सकते हैं।






