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भारत ने बोन जलवायु वार्ता में जलवायु वित्त और अनुकूलन पर संवाद की पहल की

बोन। 64वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UNFCCC) के सहायक निकायों के सत्र (SB64) के दौरान, भारत ने ग्रुप ऑफ 77 और चीन (G-77), समान विचारधारा वाले विकासशील देशों (LMDC) और BASIC समूह (ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, भारत, चीन) की ओर से लिए गए रुख के समर्थन में अपनी आवाज़ बुलंद की। इस महत्वपूर्ण सत्र में भारत ने जलवायु वित्त और अनुकूलन पर संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।

भारत ने इस सम्मेलन में स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग अत्यंत आवश्यक हैं, खासकर विकासशील देशों के लिए। देश ने जोर देकर कहा कि जलवायु वित्त के मामले में समुचित संसाधन मुहैया कराना विश्व समुदाय की जिम्मेदारी है और इसके बिना वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति संभव नहीं होगी।

ग्रुप ऑफ 77 और चीन, LMDC और BASIC समूह के स्वरूप में भारत की भागीदारी से विकसित देशों और विकासशील देशों के बीच संवाद स्थापित करने की उम्मीद बढ़ी है। भारत ने यह भी बताया कि जलवायु अनुकूलन के लिए मजबूत तंत्र बनाना अनिवार्य है ताकि किसानों, स्थानीय समुदायों तथा कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यह भी सुझाव दिया कि जलवायु कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाए जाने चाहिए। इस सत्र में भारत ने विश्व समुदाय से अपील की कि वे जलवायु वित्त पोषण और अनुकूलन की रणनीतियों पर सामूहिक रूप से काम करें। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि जलवायु परिवर्तन से अधिक प्रभावित देशों को उचित प्राथमिकता मिले।

SB64 सत्र के दौरान भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर के प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है। देश ने कहा कि यह पहलें वैश्विक महासंकट से निबटने के लिए उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का इस वैश्विक मंच पर सक्रिय और सहयोगात्मक रुख विकासशील देशों को सशक्त बनाने एवं जलवायु न्याय को प्राथमिकता देने में अहम भूमिका निभाएगा। आगामी दौर की वार्ताओं में इस संवाद को और अधिक व्यापक और ठोस बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।

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