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नई दिल्ली | 31 मार्च, 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि दशकों पुराने वामपंथी उग्रवाद के काले अध्याय का अंत हो चुका है और 31 मार्च 2026 की तारीख भारत के इतिहास में ‘नक्सल मुक्त भारत’ के रूप में दर्ज हो गई है।

नक्सलवाद का खौफनाक सच: शाह द्वारा पेश किए गए 5 बड़े खुलासे

अमित शाह ने संसद में नक्सलियों की विचारधारा और उनके नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाले तथ्य रखे:

  • हथियारों की लूट: नक्सलियों के 92% हथियार खरीदे हुए नहीं, बल्कि पुलिस थानों और शस्त्रागारों से लूटे गए थे।

  • गरीबी नहीं, विचारधारा: सहरसा जैसे गरीब इलाकों के मुकाबले नक्सलबाड़ी में प्रति व्यक्ति आय अधिक थी, जिससे साफ है कि यह आंदोलन गरीबी नहीं बल्कि एक खतरनाक विचारधारा से प्रेरित था।

  • खूनी आंकड़ा: इस संघर्ष में अब तक 20,000 से ज्यादा लोगों की जान गई, जिनमें 5,000 वीर सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।

  • अवैध वसूली: जांच में सामने आया कि नक्सली आम जनता से सालाना ₹240 करोड़ का अवैध ‘टैक्स’ वसूल रहे थे।

  • जहानाबाद जेल ब्रेक: साल 2005 की उस खौफनाक घटना का जिक्र हुआ जब 1000 नक्सलियों ने हमला कर 389 कैदियों को छुड़ा लिया था।


मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के नतीजे

गृह मंत्री ने बताया कि कैसे सरकार की सख्त रणनीति ने इस खतरे को खत्म किया:

  1. ऐतिहासिक उपलब्धि: 31 मार्च, 2026 से भारत आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त घोषित।

  2. जिलों में गिरावट: प्रभावित जिलों की संख्या 126 (2014) से घटकर अब केवल 2 रह गई है। ‘सबसे अधिक प्रभावित’ जिले अब शून्य हैं।

  3. शहरी नक्सलियों पर प्रहार: अर्बन नक्सल नेटवर्क और उनके फ्रंट संगठनों को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया है।


सरेंडर करने वालों के लिए ‘गोल्डन’ स्कीम

सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है:

  • नकद सहायता: आत्मसमर्पण पर तुरंत ₹50,000 की सहायता।

  • मासिक वजीफा: 36 महीनों तक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए मासिक आर्थिक मदद।

  • आवास और शिक्षा: पीएम आवास योजना के तहत घर और बच्चों को 12वीं तक मुफ्त शिक्षा

  • पंचायतों को इनाम: जो पंचायत पूरी तरह नक्सल मुक्त होगी, उसे सरकार 1 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान देगी।

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