
नई दिल्ली: सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा बोर्ड परीक्षा उत्तर पुस्तिका की खरीद प्रक्रिया से संबंधित जानकारी प्रदान करने में देरी और असमानता पर सूचना आयोग (CIC) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आयोग ने पारदर्शिता पैनल की सिफारिश के बाद CBSE से संशोधित और स्पष्ट उत्तर मांगे हैं, क्योंकि पहले के जवाब असंगत और अधूरी जानकारी पर आधारित थे।
सूचना आयोग ने पाया कि केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) ने विभिन्न अपवादों के तहत जानकारी देने से इनकार किया लेकिन इसके लिए कोई उचित आधार नहीं प्रस्तुत किया। आयोग ने इस पर विशेष ध्यान दिया कि RTI अधिनियम में कुछ विशेष प्रावधानों के तहत ही सूचना के प्रकटीकरण में अस्वीकृति संभव है, लेकिन सीपीआईओ द्वारा दी गई आपत्तियां अपर्याप्त और अस्पष्ट पाईं गईं।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में CBSE ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी प्रदान करने से इनकार किया था। आयोग ने इस कार्यवाही को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करे तथा सभी मांगी गई जानकारियां साझा करे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पारदर्शिता न केवल सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ाएगी, बल्कि शिक्षार्थियों और अभिभावकों के विश्वास को भी मजबूत करेगी। बोर्ड परीक्षा उत्तर पुस्तिका की खरीद प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं या अस्पष्टताओं से बचने के लिए यह कदम आवश्यक बताया जा रहा है।
इस मामले में सूचना आयोग की कार्रवाई RTI अधिनियम के तहत सरकारी विभागों और एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ करेगी। आगे की कार्रवाई में, आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि अगर जानकारी उपलब्ध कराने में कोई संवेदनशीलता है तो उसे उचित निष्पक्षता के साथ स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सर्वसाधारण और छात्र समुदाय इस फैसले से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी परीक्षा संबंधी जानकारियों में पूरी पारदर्शिता रहेगी और जोखिम भरे या मनमाने निर्णयों से बचा जा सकेगा। अंततः, यह मामला शिक्षा प्रणाली और सूचना के अधिकार के मध्य संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाएगा।






