धर्म / ज्योतिष

सुब्रमण्यम कीर्तनम मलयालम गाने के बोल

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2024: भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक पारंपरिक संगीत में सूक्ष्मताओं का अद्भुत संयोग देखने को मिलता है, और सुब्रह्मण्य कीर्तनम इसके परिचायक है। यह गीत भगवान कार्तिकेय या सुब्रह्मण्य की दिव्यता का स्तुतिपाठ है, जो मलयालम भाषा में रचा गया है। इसका लोकोत्तर सौंदर्य और भक्ति भाव इसे धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक समारोहों में अत्यंत प्रिय बनाते हैं।

सुब्रह्मण्य कीर्तनम के बोल शंभर शंकर, कुमारकनेशरम, धनु, करुणाकर और परमहंस के स्वरूपों का भावपूर्ण वर्णन करते हैं। इस गीत में भगवान सुब्रह्मण्य को शष्टिजना का प्रिय, परमेश्वर, वेदसुधा जल अधिशेष, गूहनश्वर और पार्वती के लाल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनकी महिमा, करुणा और रक्षा का भव्य चित्र इस कीर्तन में उकेरा गया है।

यह कीर्तन शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, साथ ही, यह बच्चों और युवाओं को हमारे प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी है। इसका रागमय सुर, शब्दार्थ और भक्ति भाव ऐसा सम्मोहन कर देते हैं, जो श्रोताओं के मन को आध्यात्मिक शांति की ओर ले जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सुब्रह्मण्य कीर्तनम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता आ रहा है। इसे सुनना या गाना स्वयं में एक आत्मा-शुद्धिकरण का अनुष्ठान माना जाता है। इसके साथ ही, यह कीर्तन स्थानीय मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

धार्मिक आयोजनों के दौरान इस कीर्तन के बोलों की तर्जनीकरण और कैदवाणी लोक संस्कृति में समृद्धि लाती है। जहाँ इससे भक्तों का मनोबल बढ़ता है वहीं युवाओं के बीच धार्मिक जागरूकता भी बढ़ती है।

सारांशतः, सुब्रह्मण्य कीर्तनम मलयालम भाषा के समृद्ध धार्मिक गीतों की एक अमूल्य धरोहर है जो न केवल भगवान कार्तिकेय की स्तुति करता है बल्कि सांस्कृतिक समरसता और आध्यात्मिकता को भी प्रेरित करता है। यह गीत सदियों से लोगों के दिलों में श्रद्धा और भक्ति के भावों को जीवित रखे हुए है।

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