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एनटीए में जवाबदेही की कमी

एनटीए की जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह: क्या उम्मीदवारों का भविष्य सुरक्षित है?

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की स्थापना 2017 में सोसायटीज रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के तहत एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में की गई थी, न कि संसद के किसी विशेष अधिनियम के माध्यम से। इस कारण एनटीए एक ऐसी संस्था के रूप में कार्यरत है जिसके ऊपर उम्मीदवारों के प्रति स्पष्ट और कोडिफाइड जवाबदेही मानकों का अभाव है।

एनटीए प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षाओं का संचालन करती है, जिसमें जेईई मेन, नीट समेत अन्य प्रतिष्ठित परीक्षाएं शामिल हैं। लेकिन इस संस्था की कानूनी स्थापना के ढांचे के कारण यह सामने आया है कि उसके निर्णयों और परीक्षाओं की गुणवत्ता पर पारदर्शिता की कमी है, जो भविष्य में परीक्षित छात्रों के अधिकारों और हितों को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एनटीए को एक स्वायत्त संस्था की तरह Parliament के अधिनियम के तहत स्थापित किया जाता, तो उसकी जवाबदेही और पारदर्शिता अधिक सुदृढ़ होती। वर्तमान में, उसके संचालन और परीक्षा प्रक्रिया में उत्पन्न किसी भी विवाद या असंतोष के लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है। इससे परीक्षार्थियों को न्याय पाने में कठिनाई हो सकती है।

इसके अतिरिक्त, एनटीए की संरचना एक सोसायटी के रूप में होने के कारण उसमें मानकीकृत निगरानी और जवाबदेही प्रणाली का अभाव भी देखा गया है। इस स्थिति के कारण एजेंसी द्वारा संचालित परीक्षाओं में विश्वसनीयता और परीक्षा के गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल उठते रहते हैं।

सरकार और संबंधित विभागों को इसे गंभीरता से लेते हुए एनटीए के कानूनी और प्रशासनिक ढांचे को पुनः देखें और उसे संसद के अधिनियम के तहत लाने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है। इससे न केवल परीक्षा प्रक्रिया और परिणामों की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि परीक्षार्थियों के अधिकारों की भी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उच्च शिक्षा में प्रतिस्पर्धा और उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि के साथ परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही और पारदर्शिता आवश्यक हो जाती है। एक सुदृढ़ कानून के अभाव में एनटीए के फैसलों और कार्यप्रणाली के खिलाफ कानूनी लड़ाई लंबी और जटिल हो सकती है, जो विद्यार्थियों के लिए तनाव और अनिश्चितता का कारण बनती है।

अंततः, एनटीए की जवाबदेही की कमी पर यह चर्चा महत्वपूर्ण और आवश्यक है ताकि भारत में परीक्षाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनी रहे और सभी उम्मीदवारों को न्याय मिल सके। भारत के युवा करियर के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर भरोसेमंद परीक्षा एजेंसी के प्रति विश्वास कायम रखना अति आवश्यक है।

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