कुब्बन पार्क सभी का है: सुरेश जयाराम

बेंगलुरु: बेंगलुरु के प्रसिद्ध लेखक, विजुअल आर्टिस्ट, कला इतिहासकार और क्यूरेटर सुरेश जयाराम ने अपनी नवीनतम पुस्तक “कुब्बन पार्क: नागरिकों के दृष्टिकोण और भविष्य की अनेक दृष्टियां” को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत की। यह पुस्तक न केवल कुब्बन पार्क के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालती है, बल्कि इसे भविष्य में कैसे संरक्षित और विकसित किया जा सकता है, इसपर भी विभिन्न नजरिए प्रस्तुत करती है।
सुरेश जयाराम के अनुसार, कुब्बन पार्क केवल एक हरा-भरा सार्वजनिक स्थल नहीं है बल्कि यह बेंगलुरुवासियों की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा है। उनकी पुस्तक में पार्क के इतिहास, उसके विकास की कहानी, और वहां के स्थानीय निवासियों तथा पर्यटकों की भावनाओं को बखूबी संजोया गया है। पुस्तक में जुटाए गए दृष्टिकोण बताते हैं कि कैसे पार्क हर व्यक्ति के लिए एक साझा विरासत है जिसे बचाए रखना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि इस पुस्तक का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर करना नहीं है बल्कि लोगों को पार्क के प्रति जागरूक करना और उनकी सहभागिता बढ़ाना भी है। सुरेश जयाराम ने माने की यह पुस्तक उभरती हुई पीढ़ी को प्रेरित करेगी कि वे प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए काम करें।
कुब्बन पार्क वर्षों से बेंगलुरुवासियों का पसंदीदा स्थान रहा है, जो न केवल शहरी जीवन की हलचल से आराम प्रदान करता है बल्कि कला, संस्कृति और समुदाय को भी एक साथ जोड़ता है। सुरेश जयाराम की यह पुस्तक स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद को भी प्रोत्साहित करती है ताकि पार्क का संरक्षण बेहतर ढंग से हो सके।
पुस्तक में विभिन्न विशेषज्ञों, कलाकारों और नागरिकों के इंटरव्यू तथा उनके व्यावहारिक अनुभव भी शामिल हैं, जो इसे एक बहुआयामी दस्तावेज बनाते हैं। पुस्तक का प्रकाशन समाज में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
सारांश में कहा जा सकता है कि सुरेश जयाराम की यह पुस्तक केवल कुब्बन पार्क का इतिहास ही नहीं बल्कि उससे जुड़े लोगों के स्वप्न और उम्मीदों का प्रतिबिंब है, जो भविष्य में पार्क को जीवित और प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। यह न केवल एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है बल्कि एक प्रेरणा भी है, जो सभी बेंगलुरु नागरिकों को मिले-जुले प्रयास से अपनी खूबसूरत सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का आह्वान करती है।






