अपराध

सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने रोक का आदेश नहीं दिया

इंदौर। राजा रघुवंशी हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सोनम पहले ही जमानत पर रिहा हो चुकी हैं और मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय हाईकोर्ट द्वारा सोनम को दी गई जमानत पर रोक लगाने से स्पष्ट इंकार करते हुए कहा कि इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठते हैं और उन पर आगे सुनवाई आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि सोनम पर लगे आरोप अत्यंत गंभीर हैं। इससे पहले उनकी जमानत याचिका को कई बार खारिज किया जा चुका है। मेघालय सरकार का कहना था कि सोनम के बाहर रहने पर फरार होने का खतरा बना रहेगा।

सोनम के वकील ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय वकील उपलब्ध नहीं कराया गया और उन्हें गिरफ्तारी का स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने केवल एक खाली रिपोर्ट पर दस्तखत करवाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा महत्वपूर्ण था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। अदालत ने यह भी पूछा कि अगर जमानत तकनीकी कारणों से दी गई है तो क्या पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोका जा सकता है?

यह मामला मई 2025 का है, जब सोनम पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या करवाई। इसके बाद मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून 2026 को शिलांग की अदालत द्वारा सोनम को दी गई जमानत को बरकरार रखा, जिसमें गिरफ्तारी के दौरान प्रक्रियागत खामियों को ध्यान में रखा गया था।

जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने मेघालय सरकार की अपील को खारिज करते हुए कहा कि जांच अधिकारी गिरफ्तारी के ठीक कारण नहीं बता पाए जो आरोपी के बचाव के अधिकार पर प्रभाव डालता है।

सोनम की जमानत याचिका की इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वे रोक लगाने को इच्छुक नहीं हैं और मामले की अगली सुनवाई में सब कुछ विस्तार से देखा जाएगा।

यह मामला न केवल कानूनी विवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जनता और न्याय व्यवस्था के लिए भी संवेदनशील है। अदालत द्वारा सुनवाई जारी रहने तक सोनम रघुवंशी को जमानत पर रखा गया है।

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार आगामी सुनवाई में मामलों की गहराई से समीक्षा होगी और उसके बाद ही नतीजे सामने आएंगे।

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