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उद्धव ठाकरे का Gen Z पर बड़ा बयान, बोले- ‘मुगलों ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज को चूहा कहा था’

मुंबई, महाराष्ट्र: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने नई पीढ़ी यानी Gen Z का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं को कमतर आंकना इतिहास से सबक न लेने जैसा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह आज कुछ लोग Gen Z को “कॉकरोच” कहकर उनका मजाक उड़ाते हैं, उसी तरह मुगल शासकों ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज को “चूहा” कहकर उनका अपमान करने की कोशिश की थी। लेकिन इतिहास ने साबित किया कि शिवाजी महाराज ने अपने साहस, रणनीति और नेतृत्व से एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की।

मुंबई में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि हर दौर में नई पीढ़ी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि केवल उम्र या अनुभव के आधार पर किसी व्यक्ति की क्षमता का आकलन नहीं किया जा सकता। युवाओं के भीतर नई सोच, ऊर्जा और बदलाव लाने का जज्बा होता है, जिसे पहचानने और प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

अपने संबोधन में ठाकरे ने संत ज्ञानेश्वर का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर ने बहुत कम उम्र में ‘ज्ञानेश्वरी’ जैसे महान ग्रंथ की रचना कर यह साबित कर दिया था कि प्रतिभा का उम्र से कोई संबंध नहीं होता। इसी तरह आज की युवा पीढ़ी भी विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रही है।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी भी पीढ़ी को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज को युवाओं पर भरोसा करना चाहिए और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देना चाहिए। उनके अनुसार, इतिहास गवाह है कि कई बड़े परिवर्तन युवाओं के नेतृत्व में ही संभव हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में अपने साहस और दूरदर्शिता से इतिहास रचा। इसलिए आज की युवा पीढ़ी को भी प्रेरणा देने की जरूरत है, न कि उन्हें तिरस्कार का पात्र बनाने की। ठाकरे ने कहा कि यदि युवाओं को सही दिशा और अवसर मिले तो वे देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव ठाकरे का यह बयान केवल Gen Z के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को राजनीति और सामाजिक बदलाव की मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश भी है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर नई पीढ़ी की कार्यशैली, सोच और जीवनशैली को लेकर लगातार बहस चल रही है।

हालांकि, छत्रपति शिवाजी महाराज का उदाहरण देकर की गई यह टिप्पणी राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकती है। आने वाले दिनों में इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल सकती हैं। फिलहाल उद्धव ठाकरे ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि इतिहास में जिन लोगों को कमतर आंका गया, वही आगे चलकर असाधारण उपलब्धियां हासिल करने में सफल रहे।

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