
नई दिल्ली: संसद की एक विशिष्ट समिति ने उच्च शिक्षा विभाग के बजट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तावित बजट अनुमान, वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में अपेक्षित वृद्धि से कम है। समिति ने देश की आर्थिक प्रगति और शिक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की सिफारिश की है। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत 6% जीडीपी खर्च के लक्ष्य को अब तक पूरी तरह से हासिल न करने पर भी चिंता जताई।
समिति के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा क्षेत्र में आवश्यक निवेश नहीं किया गया है, जो दीर्घकालीन विकास के लिए खतरा पैदा करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बजट आवंटन में पर्याप्त वृद्धि की जानी चाहिए ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और अकादमिक नवाचार को प्रोत्साहन मिल सके।
स्रोतों के अनुसार, समिति ने उच्च शिक्षा विभाग के बजट वृद्धि के पिछले वर्ष के रुझान की तुलना करते हुए पाया कि आगामी वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित बजट वृद्धि अपेक्षाकृत कम है। यह स्थिति शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और सुधारों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
समिति के सदस्य ने बताया, “हमारे देश में शिक्षा का स्तर सुधारना और उसे वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना बेहद आवश्यक है। इसके लिए न सिर्फ नीति बनानी होगी बल्कि वित्तीय संसाधनों का सही आवंटन भी जरूरी है। NEP के तहत 6% जीडीपी खर्च का लक्ष्य भारत को शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा पर पर्याप्त वित्तीय निवेश के बिना भारत की युवा शक्ति का पूर्ण उपयोग संभव नहीं होगा। उच्च शिक्षा क्षेत्र में सुधार नीतिगत पहल के साथ-साथ आर्थिक प्रतिबद्धता भी मांगता है। इस संदर्भ में समिति की रिपोर्ट को सरकार द्वारा गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि दीर्घकालिक विकास की नींव मजबूत हो सके।
देश में विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को बेहतर प्रोत्साहन देने के लिए बेहतर वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। समिति का यह कथन इस दिशा में बजट आवंटन की पुनर्समीक्षा का संकेत देता है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार आगामी बजट में उच्च शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रस्तावित धनराशि में वृद्धि करेगी।
अंततः, शिक्षा क्षेत्र में निवेश न केवल आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और प्रगति का भी मुख्य स्तंभ है। इसलिए, संसद की इस समिति की चेतावनी और सुझावों पर ध्यान देना आवश्यक है ताकि भारत की शिक्षा प्रणाली को एक नई दिशा मिल सके।






