व्यापार

भारतीय रिफाइनर पेटकोक का उपयोग यूरिया, मेथनॉल और अमोनिया उत्पादन के लिए कर सकते हैं: दस्टूर एनर्जी CEO

नई दिल्ली। दस्टूर एनर्जी के CEO ने हाल ही में यह सुझाव दिया है कि भारतीय रिफाइनर पेटकोक को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उसे यूरिया, मेथनॉल और अमोनिया जैसे रासायनिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नीति के संदर्भ में, पेटकोक का रिफाइनरी से गैसिफिकेशन की ओर समर्पित पुनर्निर्देशन एक बेहतर और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकता है।

पेटकोक, जो कि रिफाइनिंग प्रक्रिया का एक उपोत्पाद है, व्यापक रूप से ऊर्जा उत्पादन और इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, CEO दस्टूर ने यह माना है कि यदि इसे रसायनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के लिए गैसिफिकेशन के माध्यम से संसाधित किया जाए, तो इससे न केवल पर्यावरणीय लाभ होंगे, बल्कि भारत के उर्वरक और रासायनिक क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

उनके अनुसार, इस प्रक्रिया से पेटकोक को ऊर्जा के लिए जलाने की बजाय अधिक मूल्य वर्धित उत्पादों के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा और साथ ही आयात पर निर्भरता भी कम होगी। दस्टूर एनर्जी CEO ने सरकार से आग्रह किया कि इस दिशा में नीतिगत समर्थन बढ़ाया जाए ताकि रिफाइनरियां इस परिवर्तन को आत्मसात कर सकें।

विश्लेषकों का मानना है कि इसके लागू होने पर पेटकोक की मांग स्वरूप गतिशीलता आएगी, जिससे इसके वाहक उत्सर्जन में भी कमी संभव होगी। इसके अतिरिक्त, यूरिया और अमोनिया जैसे प्रमुख रसायनों की घरेलू उत्पादन क्षमताएं बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो कि कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

देश की बढ़ती आबादी और कृषि उत्पादन आवश्यकताओं को देखते हुए, दस्टूर एनर्जी CEO का यह सुझाव समयानुकूल है। उन्होंने बताया कि सफलता के लिए रिफाइनरियों, नीति निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों के बीच सहयोग अति आवश्यक होगा।

सारांश में, पेटकोक का उपयोग केवल एक ऊर्जा स्रोत के अलावा एक मूल्यवान रासायनिक कच्चा माल के रूप में पुनः परिभाषित किया जा सकता है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है। इस पहल को लागू करने के लिए विस्तृत योजना और सही नीति समर्थन निहायत जरूरी है।

Source

Related Articles

Back to top button