भारत-अमेरिका अंतरिम समझौते को केवल ‘अंतिम स्वरूप’ की आवश्यकता; ग्रीयर 23-24 जून को नई दिल्ली जाएंगे

नई दिल्ली। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तभी संभव होगा जब यह स्पष्ट हो कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम आयात शुल्क का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह बात एक प्रमुख आर्थिक सम्मेलन में कही।
गोयल ने बताया कि किसी भी अंतरिम या स्थायी समझौते पर अंतिम निर्णय तभी लिया जाएगा जब भारत के हितों की संपूर्ण रक्षा सुनिश्चित हो। “हम तब तक कोई भी सौदा अंतिम रूप नहीं देंगे जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि भारत को अमेरिकी या अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक लाभ होगा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने हमेशा मल्टीलेटेरल व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन द्विपक्षीय समझौतों के मामले में यह आवश्यक है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हों। “हम व्यापार सहयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह तभी संभव होगा जब आयात शुल्क और बाजार पहुंच के मुद्दों का समाधान संतुलित तरीके से हो,” गोयल ने जोर दिया।
इस बीच, अमेरिकी वाणिज्य सचिव लेना ग्रीयर 23-24 जून को नई दिल्ली के दो दिवसीय दौरे पर आ रही हैं। इस दौरान दोनों देश कई द्विपक्षीय आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा दोनों देशों के बीच समझौते को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वाणिज्य मंत्री ने यह भी कहा कि भारत के कृषि, आईटी और विनिर्माण क्षेत्रों की खास जरूरतों को ध्यान में रखकर ही कोई समझौता किया जाएगा। उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना इस बातचीत की प्रमुख प्राथमिकता होगी।
अंतरिम समझौते पर चल रही चर्चाएं दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को दर्शाती हैं। यह समझौता न केवल व्यापार घाटे को कम कर सकता है बल्कि नौकरियों के सृजन और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा देगा।
गोयल के अनुसार, “भारत एक जिम्मेदार व्यापारिक भागीदार है और वह विश्वसनीयता के साथ अपने वादों को निभाएगा। हम चाहते हैं कि इस समझौते से हमारे स्थानीय उद्योगों को फायदा हो, ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर तरीके से भाग ले सकें।”
वाणिज्य मंत्रालय ने भी यह स्पष्ट किया है कि कोई भी समझौता भारत की संप्रभुता और आर्थिक स्वायत्तता को प्रभावित नहीं करेगा। इसका उद्देश्य केवल व्यापार में उचित संतुलन बनाना और दोनों देशों के लिए लाभकारी संबंध सुनिश्चित करना है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ यह समझौता भारत के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होगा, बशर्ते कि यह भारत की मौजूदा एवं भविष्य की क्षमताओं के अनुरूप हो।
अंततः, दोनों देशों के बीच यह बातचीत यह संकेत देती है कि वे सहयोग और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाकर एक मजबूत आर्थिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले हफ्तों में चलने वाली वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।






