नियमित योग अभ्यास से संभव है स्वस्थ वृद्धावस्था: AIIMS

नई दिल्ली। विश्व की वृद्ध जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसको ध्यान में रखते हुए स्वस्थ ageing को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एक प्रोफेसर ने हाल ही में कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी से बढ़ती उम्रदराज आबादी के बीच स्वस्थ और सक्रिय जीवन सुनिश्चित करना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
AIIMS के प्रोफेसर ने बताया कि वृद्धावस्था को केवल शारीरिक रूप से कमजोर होने की अवधारणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक स्वस्थ, गतिशील और समाज में योगदान देने वाली अवस्था के रूप में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “स्वस्थ ageing के लिए रोजाना योगाभ्यास और संतुलित आहार की भूमिका अहम है। योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है बल्कि मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।”
वृद्धजन के बढ़ते स्वास्थ्य संबंधी मामलों को देखते हुए सरकारों और स्वास्थ्य संस्थानों को नीति स्तर पर भी इस विषय पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रोफेसर ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में वृद्धों के लिए पोषण, व्यायाम, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके अलावा, वृद्धों की सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम भी प्रभावी साबित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि योग और अन्य शारीरिक गतिविधियाँ वृद्धों को न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रखती हैं, बल्कि उनकी आत्म-निर्भरता और दैनिक जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ावा देती हैं। इसके अलावा, नियमित योग अभ्यास से तनाव, चिंता, और कई प्रकार की पुरानी बीमारियों जैसे हृदय रोग, मधुमेह आदि पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
समाज में वृद्ध लोग तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना सभी की जिम्मेदारी बनती है। AIIMS की टीम वर्तमान में स्वस्थ ageing पर कई शोध कार्य कर रही है, जिसे आने वाले वर्षों में और बेहतर नीतियों के निर्माण में सहायता मिलेगी। स्वस्थ उम्र बढ़ाने के लिए योग, सही खान-पान, नियमित स्वास्थ्य जांच और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना आज की जरूरत है।
अंत में, AIIMS प्रोफेसर ने कहा, “स्वस्थ ageing केवल व्यक्तिगत प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज, सरकार और स्वास्थ्य प्रदाताओं के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है ताकि हर वृद्ध व्यक्ति को सम्मानजनक और स्वास्थ्यपूर्ण जीवन मिल सके।”






