स्वास्थ्य

ताज़ा CRS डेटा में जन्मों और मृत्यु पंजीकरण में सुधार और बेहतर लिंगानुपात दर्शाया गया

नई दिल्ली। हाल ही में जारी हुए सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के नवीनतम आंकड़े जन्म और मृत्यु पंजीकरण में सुधार की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। विशेष रूप से जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार देखने को मिला है, जो सामाजिक जागरूकता और सरकारी प्रयासों के सकारात्मक परिणाम हैं।

जहां भारत के कुछ हिस्सों में ऐतिहासिक रूप से जन्म के समय लड़कियों की संख्या में कमी रही है, वहीं अब कुछ राज्यों में यह संख्या बेहतर हो रही है। केरल, जो इस मोर्चे पर सदैव से उत्कृष्ट प्रदर्शन करता आया है, ने इस बार भी लिंगानुपात में 970 लड़कियों प्रति 1000 लड़कों का आंकड़ा दर्ज किया है। यह आंकड़ा प्रदेश की सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को दर्शाता है।

राज्यों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश इस बार एक आश्चर्यचकित करने वाला नाम रहा है। यहाँ जन्म के समय 1050 लड़कियां प्रति 1000 लड़कों का अनुपात दर्ज हुआ है, जो राष्ट्रीय स्तर पर बहुत प्रशंसनीय है। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 984, मेघालय में 974 तथा मिजोरम में 972 का लिंगानुपात रिकॉर्ड हुआ है। ये आंकड़े इन क्षेत्रों में जन्म के समय लैंगिक भेदभाव को कम करने की दिशा में सकारात्मक संकेत देते हैं।

जानकारों के अनुसार, जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रणाली में सुधार ने केवल आंकड़ों की विश्वसनीयता ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि स्वास्थ्य प्रशासन को बेहतर नीति निर्धारण में भी सक्षम बनाया है। साथ ही, लैंगिक समानता पर जोर देने वाली सरकारी और गैर-सरकारी योजनाएं भी इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार न केवल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि एक समग्र सामाजिक विकास की दिशा भी संकेत करता है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रयासों को जारी रखते हुए अन्य राज्यों को भी इस दिशा में प्रगति करनी होगी ताकि पूरे देश में समानता की भावना मजबूत हो सके।

संक्षेप में, नवीनतम CRS आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और कुछ राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात बेहतर हुआ है, जो एक आशाजनक संकेत है। सरकार एवं सामाजिक संस्थानों द्वारा इस दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहने की आवश्यकता है ताकि सभी बच्चों को समान अवसर और सम्मान मिल सके।

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