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करूर भगदड़ मामला: सुप्रीम कोर्ट में डीएमके की याचिका पर सुनवाई, मंत्रियों पर गवाहों को प्रभावित करने के आरोप

नई दिल्ली, दिल्ली।
तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 7 जुलाई को सुनवाई करेगा। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की ओर से दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार के कुछ मंत्री केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के दौरान गवाहों को कथित रूप से प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि संबंधित मंत्रियों को मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस शील नागू की आंशिक कार्यदिवस पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी की ओर से की गई शीघ्र सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली। वरिष्ठ अधिवक्ता अहमदी, डीएमके सचिव आर.एस. भारती की ओर से अदालत में उपस्थित हुए और मामले की तात्कालिक सुनवाई की आवश्यकता बताई।

याचिका में कहा गया है कि जांच के दौरान कुछ मंत्रियों की सार्वजनिक टिप्पणियां और कथित गतिविधियां गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे सीबीआई जांच की निष्पक्षता पर असर पड़ने की आशंका है। इसी आधार पर अदालत से अनुरोध किया गया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित मंत्रियों को इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।

करूर भगदड़ मामला पिछले वर्ष हुई एक दुखद घटना से जुड़ा है, जिसकी जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। इस मामले को लेकर पहले भी कई कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न उठाए जा चुके हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत याचिका में जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई होगी।

यह ध्यान देने योग्य है कि याचिका में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और इन पर अदालत की ओर से कोई अंतिम टिप्पणी या निष्कर्ष नहीं दिया गया है। संबंधित पक्षों को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि अदालत के निर्देश इस मामले की जांच प्रक्रिया और आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल मामला न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

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