ईरान में नया पावर सेंटर बना अली खुमैनी? मोजतबा खामेनेई की दावेदारी पर बढ़ी चर्चा, आईआरजीसी और इस्लामी फ्रंट के समर्थन से बदले सियासी समीकरण

ईरान की राजनीति में इन दिनों नेतृत्व को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के उत्तराधिकारी को लेकर लंबे समय से मोजतबा खामेनेई का नाम चर्चा में रहा है, लेकिन अब अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के पोते अली खुमैनी भी एक नए शक्ति केंद्र के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। हाल के दिनों में उन्हें कट्टरपंथी राजनीतिक संगठन जबेह पायदारी (इस्लामी फ्रंट) और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कुछ प्रभावशाली वर्गों का समर्थन मिलने की खबरों ने ईरान की सियासत को नई दिशा दे दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अली खुमैनी ने हाल ही में कोम में आयोजित एक धार्मिक सभा के दौरान अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार के समझौते का विरोध करते हुए सख्त रुख अपनाया। उनके इस बयान को देश के हार्डलाइनर खेमे ने सकारात्मक रूप से लिया। इसके बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता और प्रभाव को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।
दूसरी ओर, मोजतबा खामेनेई को भी लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि ईरान के सर्वोच्च नेता का चयन विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) द्वारा किया जाता है और इस प्रक्रिया में धार्मिक योग्यता, राजनीतिक स्वीकार्यता तथा सुरक्षा प्रतिष्ठान का समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में किसी एक नाम पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आईआरजीसी का समर्थन ईरान की सत्ता व्यवस्था में काफी अहम माना जाता है। यदि अली खुमैनी को इस संगठन के प्रभावशाली वर्गों का व्यापक समर्थन मिलता है, तो भविष्य में उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि इस संबंध में ईरानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस बीच, क्षेत्रीय राजनीति भी तेजी से बदल रही है। ईरान खाड़ी क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाए रखने और बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद पहले की तरह बने हुए हैं। हाल में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने संबंधी दिए गए बयान ने भी क्षेत्रीय तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
फिलहाल ईरान की सत्ता में कोई औपचारिक बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अली खुमैनी को लेकर बढ़ती राजनीतिक गतिविधियां यह संकेत जरूर देती हैं कि आने वाले समय में देश की नेतृत्व राजनीति और अधिक दिलचस्प हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराधिकार को लेकर अंतिम फैसला होने तक ईरान की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति दोनों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।






