कर्नाटक में भूमि सर्वे का विरोध: AI टाउनशिप के लिए पहुंचे अधिकारियों को महिलाओं ने झाड़ू से खदेड़ा, ग्रामीणों का जमीन अधिग्रहण पर हंगामा

रामनगर, कर्नाटक
कर्नाटक के रामनगर जिले में प्रस्तावित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित एकीकृत टाउनशिप परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। बेंगलुरु के निकट स्थित मंडगहल्ली गांव में भूमि सर्वेक्षण के लिए पहुंचे सरकारी अधिकारियों का स्थानीय ग्रामीणों, खासकर महिलाओं ने जोरदार विरोध किया। विरोध के दौरान कुछ महिलाओं ने अधिकारियों को झाड़ू दिखाकर और मारकर गांव से खदेड़ दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार बिदादी क्षेत्र में एक आधुनिक एआई-आधारित एकीकृत टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसी परियोजना के तहत राजस्व विभाग और भूमि सर्वेक्षण से जुड़े अधिकारी बायरामंगला भूमि अधिग्रहण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मंडगहल्ली गांव में सर्वे करने पहुंचे थे। हालांकि अधिकारियों के पहुंचते ही बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और बच्चे मौके पर एकत्र हो गए और सर्वेक्षण का विरोध शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्रामीणों ने अधिकारियों को गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया और रास्ता जाम कर दिया। हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शनकारी महिलाओं और अधिकारियों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते कुछ महिलाओं ने झाड़ू लेकर अधिकारियों को वहां से वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में पुलिसकर्मियों को भी धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा और कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी कृषि भूमि किसी भी कीमत पर अधिग्रहित नहीं होने देंगे। उनका आरोप है कि सरकार उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। किसानों का कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है और जमीन चले जाने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। इसी वजह से गांव के लोगों ने एकजुट होकर सर्वेक्षण का विरोध किया।
दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि प्रस्तावित एआई टाउनशिप परियोजना से क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास होगा। सरकार परियोजना को बेंगलुरु के विस्तार और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप महत्वपूर्ण मान रही है। हालांकि प्रभावित गांवों के लोगों की आपत्तियों के कारण फिलहाल परियोजना को लेकर विवाद बना हुआ है।
घटना के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी और ग्रामीणों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। वहीं स्थानीय किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता या किसानों की मांगों पर संतोषजनक समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देशभर में विकास परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण को लेकर समय-समय पर ऐसे विवाद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की सफलता के लिए स्थानीय लोगों का विश्वास और सहमति महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सरकार और प्रभावित ग्रामीणों के बीच संवाद ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकाल सकता है।






