अंतरराष्ट्रीय

फ्रांस ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए उठाया बड़ा कदम, 15 साल से कम उम्र वालों के सोशल मीडिया उपयोग पर लगी रोक

पेरिस, फ्रांस

फ्रांस ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला लिया है। देश की संसद ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ फ्रांस यूरोपीय संघ (EU) का पहला देश बन गया है, जिसने कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर कानूनी रोक लगाने का कदम उठाया है। सरकार का मानना है कि यह कानून बच्चों को इंटरनेट पर बढ़ते खतरों, साइबर बुलिंग, मानसिक तनाव और अनुचित डिजिटल सामग्री से बचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लंबे समय से बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात करते रहे हैं। उनकी सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इसी कारण सरकार ने ऐसा कानून तैयार किया, जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों के लिए उपयोगकर्ताओं की उम्र की पुष्टि करना अनिवार्य होगा। यदि कोई प्लेटफॉर्म इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

फ्रांसीसी सीनेट ने मंगलवार को इस विधेयक को मंजूरी दी। इसके बाद नेशनल असेंबली में भी यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, कानून के पक्ष में 279 वोट पड़े, जबकि 81 सांसदों ने इसका विरोध किया। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून फ्रांस की डिजिटल सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

नए प्रावधानों के अनुसार 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से नया अकाउंट नहीं बना सकेंगे। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, एक्स (पूर्व में ट्विटर), स्नैपचैट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने यूजर्स की उम्र सत्यापित करने के लिए प्रभावी तकनीकी व्यवस्था लागू करनी होगी। सरकार का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे बिना निगरानी के ऐसे ऑनलाइन वातावरण में प्रवेश न करें, जहां उन्हें मानसिक, सामाजिक या भावनात्मक नुकसान पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में बच्चों के बीच सोशल मीडिया की लत तेजी से बढ़ी है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम, ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी समाचार, हिंसक और आपत्तिजनक सामग्री तथा सोशल मीडिया पर मिलने वाले दबाव का असर बच्चों के आत्मविश्वास, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर देखा गया है। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि कम उम्र में लंबे समय तक सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों की नींद, व्यवहार और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करता है। इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए फ्रांस ने यह सख्त कदम उठाया है।

हालांकि, इस कानून को लेकर कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि उम्र सत्यापन प्रणाली को लागू करना आसान नहीं होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहे और गोपनीयता से कोई समझौता न हो। इसके बावजूद अधिकांश विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सरकारों को अब पहले से अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

फ्रांस का यह फैसला केवल उसके अपने नागरिकों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर पूरे यूरोप में देखने को मिल सकता है। कई यूरोपीय देशों में पहले से ही बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर नियमों पर चर्चा चल रही है। ऐसे में फ्रांस का यह कानून अन्य देशों के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है। आने वाले समय में यदि अन्य यूरोपीय देश भी इसी दिशा में कदम उठाते हैं, तो सोशल मीडिया कंपनियों को पूरे क्षेत्र में अपनी नीतियों और तकनीकी व्यवस्था में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।

डिजिटल युग में जहां बच्चों की ऑनलाइन मौजूदगी लगातार बढ़ रही है, वहीं उनकी सुरक्षा भी सरकारों और समाज के सामने एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। फ्रांस का यह फैसला इसी जिम्मेदारी को निभाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित और संतुलित डिजिटल वातावरण तैयार करना है।

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