तकनीकशिक्षा

आईआईटी-क ने सीबीएसई पोर्टल की ‘कमजोरियां’ उजागर करने वाले एथिकल हैकर को किया नियुक्त

नयी दिल्ली। देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान IIT-Kharagpur ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नवाचार और प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए एक अनूठी पहल की घोषणा की है। संस्थान के निदेशक मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि अब इस संस्थान में साइबर सुरक्षा में स्नातक की पढ़ाई शुरू की जाएगी, जिसके लिए प्रवेश प्रक्रिया पारंपरिक JEE (Advanced) की बजाय एक हैकथॉन के माध्यम से होगी।

मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि यह निर्णय खासतौर पर उन्हीं छात्रों के लिए प्रेरक होगा जो तकनीकी क्षेत्र में रचनात्मकता और कौशल के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। साइबर सुरक्षा आज के डिजिटल युग में सबसे महत्वपूर्ण और मांग वाले क्षेत्रों में से एक बन चुका है, इसलिए IIT-K अपने छात्रों को इस क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना चाहता है।

उन्होंने आगे कहा, “हैकथॉन के जरिए चयन प्रक्रिया से हम उन छात्रों की खोज कर पाएंगे जिनमें समस्या सुलझाने की दक्षता और तकनीकी प्रतिभा है। यह पारंपरिक परीक्षा प्रणाली से हटकर एक व्यावहारिक और चुनौतीपूर्ण तरीका होगा जिससे सबसे योग्य उम्मीदवार चुने जा सकेंगे।”

यह पहल इस बात पर जोर देती है कि तकनीकी शिक्षा में नयी सोच और रचनात्मकता का कितना महत्व है। IIT-K ने साइबर सुरक्षा क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए इस तरह की शिक्षा पद्धति अपनाई है। इस कोर्स में छात्रों को साइबर हमलों, नेटवर्क सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और नैतिक हैकिंग जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही इस तरह के नए प्रवेश मॉडल तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ और प्रासंगिक बनाएंगे। साथ ही यह भी उम्मीद की जा रही है कि इससे युवाओं में तकनीकी क्षेत्र के प्रति रुचि बढ़ेगी और देश को योग्य डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञ मिलेंगे।

अंत में IIT-Kharagpur की यह पहल न केवल छात्रों के लिए अवसर लेकर आ रही है बल्कि यह भारत को तकनीकी सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। छात्रों और अभिभावकों के बीच इस नए प्रवेश मॉडल को लेकर उत्सुकता दिखाई दे रही है, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत हो सकती है।

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