गर्मी की लहर और ओजोन स्तर में वृद्धि से भारत में हृदय रोग से मृत्यु दर बढ़ी: अध्ययन

नई दिल्ली: एक हालिया सहकर्मी समीक्षा किए गए अध्ययन में सामने आया है कि उत्तर भारत में गर्मी की लहर के दौरान सतही ओजोन का स्तर 85 से 110 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुँच जाता है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सुझाए गए 70 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा से कहीं अधिक है। इस अध्ययन में यह भी बताया गया है कि पूरे भारत में ओजोन स्तर डब्ल्यूएचओ के मानकों को पार कर रहा है, जिससे जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 की गर्मी की लहर के दौरान लगभग 830 अधिक मौतें दर्ज की गईं, जो कि पूर्ववर्ती दिनों की तुलना में काफी अधिक हैं। इन मौतों का मुख्य कारण हृदय रोग से संबंधित है, जिसे विशेषज्ञों ने ओजोन और तापमान के संयुक्त प्रभाव से जोड़कर देखा है।
डॉक्टरों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी की बढ़ती तीव्रता और प्रदूषण स्तर में वृद्धि से हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा और अधिक बढ़ गया है। सतही ओजोन एक विषैली गैस है जो फेफड़ों और हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। जब इसे उच्च तापमान के साथ जोड़ा जाता है, तो इससे सांस लेने में दिक्कत, हृदय गति में असामान्यता, और गंभीर मामलों में मृत्यु तक हो सकती है।
अध्ययन में यह सुझाव दिया गया है कि सरकार को सख्त पर्यावरणीय नीतियों के साथ-साथ नागरिकों को ओजोन और गर्मी से सुरक्षा के उपायों के प्रति जागरूक करना चाहिए। इसके अलावा, शहरों में हरित क्षेत्रों का विकास, प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना बेहद आवश्यक है।
इस तरह के अध्ययन इस बात पर जोर देते हैं कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता। मौजूदा समय में न केवल भारत बल्कि विश्वभर में पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाना आवश्यक हो गया है।






