स्वास्थ्य

भारत का मधुमेह देखभाल अनुभव अन्य विकासशील देशों के लिए मार्गदर्शक हो सकता है: वी. मोहन

नई दिल्ली: प्रसिद्ध मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. वी. मोहन ने हाल ही में प्रकाशित एक लेख में भारत के मधुमेह देखभाल अनुभव को अन्य विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बताया है। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका Diabetologia में प्रकाशित हुआ है, जिसमें डॉ. मोहन ने स्थानीय समाधान और समाहित देखभाल (integrated care) मॉडल की आवश्यकता पर जोर दिया है।

चेंन्नई स्थित इस विशेषज्ञ ने कहा कि मधुमेह जैसी जटिल बीमारी से निपटने के लिए केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने तकनीकी हस्तक्षेपों को अपनाने की सलाह दी है ताकि देखभाल प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इनमें एआई आधारित चैटबॉट्स, टेलीमेडिसिन सेवाएं और चिकित्सक निर्णय समर्थन उपकरण (physician decision support tools) शामिल हैं।

डॉ. मोहन ने अपने लेख में स्थानीय स्तर पर समस्या की पहचान कर उसे समझने और उसके अनुसार समाधान विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में जहां मधुमेह की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वहां उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल और रोग प्रबंधन के लिए नवीन तकनीकों का इस्तेमाल बेहद जरूरी हो गया है।

उन्होंने बताया कि टेलीमेडिसिन के जरिये दूर-दराज के इलाकों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श संभव हो गया है, जिससे रोगी की यात्रा, समय और खर्च की बचत होती है। साथ ही, एआई चैटबॉट्स रोगियों को उनकी दवाइयां लेने, खान-पान और व्यायाम पर उचित समय पर सलाह देकर रोग नियंत्रण में सहायता करते हैं। चिकित्सकों के लिए निर्णय समर्थन उपकरण मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और अन्य जानकारियों के आधार पर इलाज की सर्वोत्तम योजना बनाने में मददगार साबित हो रहे हैं।

यह अध्ययन वैश्विक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है क्योंकि मधुमेह एक विश्वव्यापी चुनौती बन चुका है। विकासशील देश जहां संसाधनों की कमी है, वहां इन तकनीकी उपायों का अनुकूलन मरीजों के इलाज में नई क्रांति ला सकता है।

अंत में डॉ. मोहन ने भारत के मधुमेह देखभाल मॉडल को एक उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि अन्य देश अपने सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश के अनुसार समाहित योजनाएं लागू करें तो मधुमेह से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के शोध और तकनीकी विकास से मधुमेह रोगियों की जिंदगी में सुधार होगा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी बढ़ेगी।

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