तकनीकशिक्षा

एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में इमरजेंसी को ‘लोकतंत्र के लिए चुनौती’ के रूप में प्रस्तुत किया

नई दिल्ली: भारत में 1975 में लागू हुई आपातकाल की घोषणा को 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के विषय को शामिल किया है। इसे लोकतंत्र के लिए एक चुनौती के रूप में दर्शाया गया है। इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस कदम की खुले दिल से सराहना की है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि NCERT ने सही कदम उठाया है, क्योंकि इतिहास को सही और सटीक तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक है। उनकी माने तो यह न केवल विद्यार्थी के लिए समसामयिक विषय को समझने का अवसर है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाए रखने के महत्व को भी दर्शाता है।

आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक चला था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल घोषित कर कई नागरिकों की बुनियादी स्वतंत्रताएं सीमित कर दी थीं। यह घटना भारत के लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय मानी जाती है। इस विषय को पाठ्यपुस्तक में शामिल करने से विद्यार्थियों को उस दौर की जटिलताओं और राजनीतिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

NCERT के इस कदम को शिक्षा विशेषज्ञों ने भी उचित और अत्यंत आवश्यक बताया है। उनका मानना है कि इतिहास की शिक्षा में संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों को शामिल करना विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक दृष्टिकोण को मजबूत करता है। साथ ही, इससे वे समाज और राजनीति की गहराईयों को बेहतर समझ पाएंगे।

इस बदलाव के मद्देनजर, आगामी शैक्षणिक सत्र से नई पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें आपातकाल की घटनाओं का विस्तृत विवेचन होगा। इससे देश के युवा इतिहास के सबसे विवादास्पद दौर को समझने के साथ-साथ लोकतंत्र की सुरक्षा के प्रति सजग होंगे।

सरकार का यह कदम लोकतंत्र की संवेदनशीलताओं को समझाने और इतिहास को सही आईना दिखाने का प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा के माध्यम से ही हम नागरिकों में लोकतांत्रिक चेतना विकसित कर सकते हैं, और NCERT ने इस दिशा में ठोस पहल की है।

Source

Related Articles

Back to top button