एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने आश्वासन दिया: कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक की पहुंच कभी नहीं रोकी जाएगी

अमेरिका में आयोजित दो दिवसीय पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन में श्री एस. कृष्णन ने भाग लिया। इस सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और संबंधित तकनीकों के विकास एवं सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
एस. कृष्णन, जो एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी हैं, ने आश्वासन दिया कि एक बार प्रदान किए जाने के बाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकों तक पहुंच को कभी भी अवरुद्ध नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी सहयोग और पारदर्शिता दोनों देशों के बीच विश्वास का आधार हैं।
पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता, और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। इस मंच पर विश्व की प्रमुख तकनीकी चुनौतियों और उनके समाधान पर गहन विचार-विमर्श हुआ। कृष्णन ने कहा, “भारत में एआई तकनीक के विकास एवं उपयोग में पारदर्शिता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाएगा, जिससे सभी हितधारकों को लाभ हो।”
सम्मेलन के दौरान डेटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार, और तकनीकी नवाचारों के न्यायसंगत वितरण जैसे विषयों पर संवाद हुआ। कृष्णन ने यह भी कहा कि भारत उन देशों के साथ सहयोग को बढ़ावा देगा, जो एआई के नैतिक और प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने में विश्वास रखते हैं।
विशेषज्ञों ने पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन को एक मंच माना जहाँ तकनीकी प्रगति को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ा जा सकता है। श्री कृष्णन के विचारों से यह स्पष्ट होता है कि भारत भविष्य में भी ऐसे सहयोगों को महत्व देगा, जिससे तकनीकी विकास में बाधा न आए और सभी को समान अवसर मिल सकें।
इस तरह की बैठकों से वैश्विक स्तर पर तकनीकी साझेदारी मजबूत होती है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। भारत की भागीदारी इस बात का संकेत है कि देश एआई क्षेत्र में अपनी भूमिका को और प्रभावशाली बनाना चाहता है।
वहीं, श्री कृष्णन के आश्वासन से यह स्पष्ट होता है कि एआई तकनीक की पहुंच को लेकर भारत में स्थिर और विश्वसनीय नीति बनाई जाएगी ताकि तकनीकी उपयोगकर्ताओं को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान की जा सके।






