आपातकाल के दौरान मेरे पिता 19 महीने भूमिगत रहे, याद करते हैं पी.वी.एन. माधव

आम जनता की आंखों और कानों तक सूचनाओं को पहुंचाने का कार्य पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसी कड़ी में, हाल ही में आयोजित चौथे स्मृति व्याख्यान के दौरान, राज्य भाजपा अध्यक्ष पी.वी.एन. माधव ने अपने पिता के महामारी काल के दौरान भूमिगत रहने की कहानी साझा की। यह व्याख्यान उनके 92वें जन्मदिन की याद में आयोजित किया गया था।
पी.वी.एन. माधव ने बताया कि आपातकाल के समय उनके पिता ने लगभग 19 महीने भूमिगत रहकर लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि यह कठिन अवधि न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए यादगार और चुनौतीपूर्ण थी। इस आपातकालीन काल में अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनके पिता ने छिप कर ही सही, लेकिन निरंतर लोकतंत्र के लिए संघर्ष जारी रखा।
उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने अपने जुनून और देशभक्ति के बलबूते इस कठिन दौर में भी हार नहीं मानी। उनकी भूमिगत जीवनशैली ने न केवल उन्हें बल्कि हमारे पूरे परिवार को भी सशक्त और समझदार बनाया।” भाजपा अध्यक्ष ने यह भी जोड़ा कि यह कहानी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है और हमें लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहने की याद दिलाती है।
समारोह में कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार प्रकट किए और आपातकाल के समय राजनीतिक संघर्षों पर चर्चा की। यह व्याख्यान न केवल एक ऐतिहासिक घटना के पुनरावलोकन के रूप में काम आया, बल्कि लोकतंत्र के महत्व को भी पुनः स्थापित करने का माध्यम बना।
इस आयोजन के अंत में पी.वी.एन. माधव ने नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक रहें और देश के संविधान का सम्मान करें। उनके इस संदेश ने वहां उपस्थित सभी लोगों को प्रेरित किया।
स्वतंत्रता के बाद भारत ने अनेक बार कठिन परिस्थितियों का सामना किया, परन्तु लोकतंत्र की मजबूत नींव ने हर बार देश को उन्नति के पथ पर अग्रसर किया। यह घटना हमें यह साबित करती है कि जब देशभक्ति और न्याय की भावना एकजुट होती है, तो कोई भी बाधा लंबे समय तक स्थायी नहीं रह सकती।






