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कृति करण्थ बनीं 2026 का रोलेक्स नेशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरर ऑफ द ईयर

बेंगलुरु। केन्द्रीय वन्यजीव अध्ययन संस्था (CWS) की सीईओ और संरक्षण वैज्ञानिक कृति करण्थ को 2026 के लिए रोलेक्स नेशनल जियोग्राफिक एक्सप्लोरर ऑफ द ईयर चुना गया है। यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व की बात है क्योंकि कृति करण्थ पहली दक्षिण एशियाई हैं जिन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है।

कृति करण्थ की इस उपलब्धि के पीछे चार दशकों से चल रही CWS की वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन की गहन रिसर्च और सक्रियता का बड़ा योगदान है। CWS ने जंगलों और बस्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं, जिससे स्थानीय आबादी और वन्य जीव दोनों को लाभ हुआ है।

भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक जटिल मुद्दा है। बढ़ती जनसंख्या और आवास विस्तार से वन्यजीव प्राकृतिक आवास गंवा रहे हैं, जिससे वे मानव-निवास क्षेत्रों में आ जाते हैं। कृति करण्थ ने इस समस्या को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और व्यवहारिक समाधान विकसित किए हैं। उनकी टीम ने किसानों और जंगलवासियों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाए हैं ताकि दोनों पक्षों के बीच सहअस्तित्व संभव हो सके।

CWS के संरक्षण कार्यक्रमों में बाघों, हाथियों और अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। संस्था ने खूबसूरती से मानव-वन्यजीव सीमा क्षेत्रों में निगरानी तंत्र स्थापित किया है, जिससे संघर्ष की घटनाएं कम हुई हैं। इसके साथ ही, CWS ने पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया है, जिसके तहत ग्रामीणों को संरक्षण कार्य में शामिल किया जाता है।

कृति करण्थ का मानना है कि स्थानीय समुदायों की सहभागिता के बिना वन्यजीव संरक्षण सम्भव नहीं है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में CWS अपने सतत विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखकर नयी तकनीकों और रणनीतियों को अपनाएगा। साथ ही, युवा वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करने और संरक्षण विज्ञान को और मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा।

कृति करण्थ की इस उपलब्धि से यह संदेश जाता है कि भारत दुनिया के वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उनकी मेहनत और समर्पण न केवल उनकी संस्था के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा भी है। आने वाले वर्षों में भारत की वन्यजीव संरक्षण की पहल और प्रभावी होगी, इसे कृति करण्थ और CWS की योजनाओं के आधार पर देखा जा सकता है।

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