सीजेपी विरोध के 15वें दिन ताजा राजनीतिक समर्थन, छात्र अस्पताल में भर्ती

नई दिल्ली: पर्यावरण एवं शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार सातवें दिन अपने Hunger Strike पर हैं। वे इस अनशन के माध्यम से परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं को लेकर संसद के आगामी मानसून सत्र में चर्चा को मजबूर करना चाहते हैं।
सोनम वांगचुक ने पिछले सप्ताह अपनी मांगों के समर्थन में अनशन शुरू किया था, जिसमें उन्होंने परीक्षाओं में मानकीकरण की कमी और अनुचित प्रक्रियाओं को उजागर किया। इस मुद्दे पर कई राजनीतिक दलों और नेताओं ने उनकी आवाज को समर्थन दिया है।
राजनीतिक नेताओं का कहना है कि इस बार मानसून सत्र में वे इस विषय को गंभीरता से उठा कर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए दबाव बनाएंगे। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता महत्वपूर्ण है, और इसके लिए हमें प्रणालीगत सुधार करने होंगे।”
चूंकि सोनम वांगचुक का अनशन सात दिनों से जारी है, इसलिए उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शहर के कुछ अस्पतालों में उनकी जांच की पुष्टि की है और कहा कि उन्हें निरंतर मेडिकल मॉनिटरिंग की जरूरत है।
सोनम वांगचुक के समर्थक और नागरिक संगठनों ने भी उनके समर्थन में प्रदर्शन किये और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाने की कोशिश की। कई विद्यार्थियों ने भी इस संघर्ष में शामिल होकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की।
शिक्षा विभाग ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन आने वाले दिनों में संसद में होने वाली बहस के बाद प्रत्युत्तर मिलने की उम्मीद है।
इस अनशन ने देश के शिक्षा तंत्र में छुपे दोषों को पुनः सामने लाने का काम किया है और सभी की नजरें अब मानसून सत्र पर टिकी हैं कि कैसे हमारे विधायकों द्वारा इस मामले को हल किया जाएगा।
कुल मिलाकर, सोनम वांगचुक का यह आंदोलन शिक्षा क्षेत्र में सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो दिखाता है कि सामाजिक और राजनीतिक दबाव से ही बदलाव संभव है।






