भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर रूस से भारत की दोटूक बात: एस. जयशंकर ने लावरोव के समक्ष जताई चिंता

मनीला, फिलीपींस
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में काला सागर क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन के तट के निकट एक वाणिज्यिक जहाज पर रूसी हवाई हमले में चार भारतीय चालक दल के सदस्यों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
जयशंकर और लावरोव के बीच यह मुलाकात फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान हुई। बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों के अलावा व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात पर भी चर्चा की। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि उन्होंने काला सागर क्षेत्र में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं से रूसी पक्ष को अवगत कराया और यूक्रेन संघर्ष के ताजा घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
भारत ने हालिया घटना को गंभीरता से लेते हुए रूस के समक्ष अपनी चिंता पहले भी दर्ज कराई थी। इससे एक दिन पहले नई दिल्ली में रूस के दूतावास के प्रभारी व्लादिमीर लादानोव को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। इस दौरान यूक्रेन के तट के निकट गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर हुए रूसी हमले को लेकर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की और स्पष्ट शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
विदेश मंत्रालय का कहना है कि विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेष रूप से युद्धग्रस्त क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
भारत लंबे समय से रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की वकालत करता रहा है। भारत का रुख रहा है कि किसी भी विवाद का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान के आधार पर होना चाहिए। इसी नीति के तहत भारत दोनों देशों के साथ संवाद बनाए हुए है।
विश्लेषकों का मानना है कि चार भारतीय नाविकों की मौत के बाद यह मुद्दा भारत के लिए और अधिक संवेदनशील हो गया है। ऐसे में रूस के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना भारत की कूटनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे भी अपने नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है।






