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नशा मुक्त भारत अभियान के 6 वर्ष पूरे होने पर 18 अगस्त को 12 करोड़ लोगों को शपथ दिला सकते हैं पीएम मोदी, देशव्यापी अभियान की तैयारी तेज

नशे के खिलाफ जनजागरूकता को और व्यापक बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार 18 अगस्त को एक ऐतिहासिक अभियान की तैयारी में जुटी है। नशा मुक्त भारत अभियान की छठी वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशभर के 12 करोड़ से अधिक नागरिकों को ड्रग्स और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक शपथ दिला सकते हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इस पहल के माध्यम से नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज के विभिन्न वर्गों को इस अभियान से जोड़ना है।

मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, देशव्यापी सामूहिक शपथ कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस संबंध में संयुक्त सचिव (ड्रग रोकथाम) संदीप रेवाजी राठौड़ ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कार्यक्रम के क्रियान्वयन की रणनीति को अंतिम रूप देने के साथ-साथ अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शपथ कार्यक्रम को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित किया जाए, ताकि देश के हर हिस्से से अधिक से अधिक नागरिक इसमें शामिल हो सकें। अधिकारियों ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से लोगों तक पहुंच बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय संस्थानों का प्रभावी उपयोग करने की रणनीति पर भी विचार किया।

सरकार की योजना के अनुसार इस अभियान में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय, राज्य सरकारें, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक उपक्रम (PSUs), स्वायत्त निकाय, फील्ड कार्यालय और अन्य सरकारी संस्थाएं सक्रिय भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से भी लोगों को अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

बैठक में अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्रों, अभिभावकों, स्वयंसेवकों और विभिन्न हितधारकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। मंत्रालय ने रेलवे, रक्षा, पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), आयुष, ग्रामीण विकास, राजस्व विभाग सहित अन्य सरकारी संस्थानों को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, आध्यात्मिक संगठनों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी जनजागरूकता अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा।

सरकार का मानना है कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौती भी है। इसलिए जनभागीदारी के माध्यम से लोगों में जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। सामूहिक शपथ के जरिए नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने और समाज को नशामुक्त बनाने के लिए साझा संकल्प मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2020 में देशभर में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम और जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। पिछले छह वर्षों के दौरान इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। सरकार का दावा है कि अभियान के माध्यम से लाखों युवाओं और नागरिकों तक नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी पहुंचाई गई है।

यदि 18 अगस्त को प्रस्तावित कार्यक्रम में 12 करोड़ से अधिक लोग शामिल होते हैं, तो यह नशे के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े जन-जागरूकता अभियानों में से एक माना जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि इस सामूहिक शपथ के माध्यम से समाज में नशे के खिलाफ मजबूत संदेश जाएगा और युवाओं को स्वस्थ, सुरक्षित एवं जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

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