ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सरकार सख्त, VRS और रेजिग्नेशन मंजूरी के नियम बदले

नई दिल्ली, भारत
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में पिछले एक वर्ष के दौरान वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बढ़ते इस्तीफों के बाद केंद्र सरकार ने नियमों को और सख्त कर दिया है। अंतरिक्ष विभाग (Department of Space-DoS) ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और इस्तीफों से जुड़े मामलों की मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव करते हुए नया निर्देश जारी किया है। इसका उद्देश्य अनुभवी वैज्ञानिकों के संगठन छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाना और महत्वपूर्ण परियोजनाओं में विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले एक साल में ISRO के 100 से अधिक वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों ने इस्तीफा दिया है। इनमें कई वरिष्ठ विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जिन्होंने निजी अंतरिक्ष कंपनियों या अन्य संस्थानों का रुख किया। भारत में तेजी से बढ़ते निजी स्पेस सेक्टर और बेहतर वेतन पैकेज को इस बदलाव का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में अंतरिक्ष विभाग ने नया प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। अब वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) से जुड़े मामलों को केवल संबंधित केंद्र स्तर पर मंजूरी नहीं दी जाएगी। ऐसे सभी प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए अंतरिक्ष विभाग के मुख्यालय (Headquarters) भेजे जाएंगे, जहां प्रत्येक मामले की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी महत्वपूर्ण मिशन, अनुसंधान परियोजना या रणनीतिक कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे का प्रभाव राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम पर न पड़े। साथ ही, प्रत्येक मामले में संगठनात्मक आवश्यकता और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।
हाल के वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। स्पेस सेक्टर के उदारीकरण के बाद कई स्टार्टअप और निजी कंपनियां रॉकेट, सैटेलाइट, लॉन्च सेवाओं और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रही हैं। इससे अनुभवी वैज्ञानिकों की मांग भी बढ़ी है, जिसके चलते कई विशेषज्ञ बेहतर अवसरों के लिए निजी क्षेत्र का रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनुभवी वैज्ञानिकों का बड़े पैमाने पर संगठन छोड़ना किसी भी अनुसंधान संस्थान के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि केवल प्रशासनिक नियमों को सख्त करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को लंबे समय तक संगठन से जोड़कर रखने के लिए बेहतर करियर ग्रोथ, प्रतिस्पर्धी वेतन, अनुसंधान सुविधाएं और नवाचार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
सरकार की नई नीति को ISRO के मानव संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इन बदलावों से वैज्ञानिकों के इस्तीफों की संख्या में कितनी कमी आती है और इसका भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों पर क्या प्रभाव पड़ता है।






