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‘बुलडोजर कार्रवाई पर पूरी तरह रोक नहीं’, अवैध निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली, भारत

अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि नवंबर 2024 में दिए गए उसके फैसले का अर्थ यह नहीं है कि अवैध निर्माणों को ध्वस्तीकरण से पूरी तरह सुरक्षा मिल गई है। हालांकि, अदालत ने यह भी दोहराया कि किसी भी निर्माण को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) देना और जवाब के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी उन अवमानना याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की, जिनमें आरोप लगाया गया था कि विभिन्न राज्यों में अदालत के 13 नवंबर 2024 के फैसले का पालन नहीं किया गया। अदालत ने इन मामलों में यह भी कहा कि संबंधित हाई कोर्ट पहले इन याचिकाओं पर विचार करें और कानून के अनुसार निर्णय लें।

क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?

13 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी भी मकान, दुकान या अन्य संपत्ति को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस देना जरूरी होगा। इसके साथ ही प्रभावित पक्ष को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए 15 दिनों का पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा था कि प्रशासन को ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी तरीके से अपनानी होगी। बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए किसी भी संपत्ति को गिराना कानून के अनुरूप नहीं माना जाएगा।

‘अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं’

ताजा सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसके पिछले फैसले का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि यदि कोई निर्माण वास्तव में अवैध है, तो प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन यह कार्रवाई विधिसम्मत प्रक्रिया (Due Process of Law) का पालन करते हुए ही की जानी चाहिए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य अवैध निर्माणों को संरक्षण देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन न हो और प्रशासन मनमाने ढंग से बुलडोजर कार्रवाई न करे।

हाई कोर्ट करेंगे अवमानना याचिकाओं की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके निर्देशों के कथित उल्लंघन से जुड़ी अवमानना याचिकाओं पर संबंधित हाई कोर्ट पहले सुनवाई करें। यदि किसी मामले में अदालत के निर्देशों का पालन नहीं हुआ है, तो हाई कोर्ट कानून के अनुसार उचित आदेश पारित कर सकते हैं।

देशभर के लिए लागू हैं दिशा-निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के दिशा-निर्देश पूरे देश में लागू हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले और प्रशासन कानूनी प्रक्रिया का पालन करे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी एक बार फिर स्पष्ट करती है कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जारी रह सकती है, लेकिन प्रशासन को संविधान और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

फिलहाल, शीर्ष अदालत ने यह साफ कर दिया है कि बुलडोजर कार्रवाई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। यदि कोई निर्माण अवैध पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन उससे पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना, जवाब के लिए पर्याप्त समय देना और न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

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