क्यों रोगी जो एक साथ कई पुरानी बीमारियों से ग्रस्त होते हैं, वर्षों तक सही इलाज खोजने में लगाते हैं

नई दिल्ली। इलाज में देरी, असंगठित चिकित्सा सेवाएँ और उच्च उपचार लागत इन सभी कारकों से कई मरीज विशेष रूप से उन लोगों को भारी परेशानी हो रही है जिनमें एक से अधिक पुरानी बीमारियाँ एक साथ पाई जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पाश सिंड्रोम (PASH syndrome), हाइड्राडेनिटिस सुप्पुरेटिवा (hidradenitis suppurativa), फाइब्रोमायल्जिया (fibromyalgia) और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (irritable bowel syndrome) जैसी जटिल स्थितियों से ग्रस्त मरीजों को सटीक निदान और उचित देखभाल मिलने में वर्षों लग जाते हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों का लक्षण अक्सर एक-दूसरे से मिश्रित हो जाते हैं, जिससे चिकित्सकों के लिए स्थिति की सही पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही, विभिन्न विभागों में बंटी हुई देखभाल प्रणाली मरीजों को निरंतर और समन्वित इलाज नहीं दे पा रही है, जिससे उनकी तकलीफ और बढ़ जाती है।
डॉ. रहींम खान, जो एक वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं, कहते हैं, “पाश सिंड्रोम और हाइड्राडेनिटिस सुप्पुरेटिवा जैसी स्थितियों में रोगों के अनेक पहलुओं को समझना आवश्यक होता है। लेकिन इलाज में देरी और विशेषज्ञों के बीच समन्वय की कमी के कारण मरीजों की समस्या बढ़ती जाती है।”
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि फाइब्रोमायल्जिया और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसे रोगों के कारण मरीजों का जीवन स्तर काफी प्रभावित होता है, क्योंकि इन रोगों के लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं और इनके लिए परिपूर्ण इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
इतना ही नहीं, खर्च की बात करें तो मरीजों पर उपचार की उच्च लागत भी भारी पड़ती है। कई बार मरीजों को बार-बार विभिन्न डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया में कई मरीज मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाते हैं।
एकीकृत और समन्वित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की कमी के कारण इस समस्या का समाधान ढूंढ़ना जरूरी हो गया है। विशेषज्ञ का सुझाव है कि बेहतर निदान के लिए मल्टीडिसिप्लिनरी टीमों का गठन किया जाना चाहिए, जो मरीज की संपूर्ण स्थिति का मूल्यांकन कर एक साथ योजना बनाएं।
इसके अलावा, सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति निर्माताओं को भी ऐसे रोगों की पहचान, उपचार सुविधाओं को सुलभ बनाने और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने होंगे। मरीजों को सही समय पर सही इलाज मिले, इसके लिए यह जरूरी है कि स्वास्थ्य संस्थान अधिक सहयोगात्मक और रोगमुक्त व आसपास के मरीजों के लिए समझदार बनें।
इस तरह के रोग जो अक्सर एक साथ कई जटिलताएं पैदा करते हैं, उनका प्रबंधन आधुनिक चिकित्सा प्रणाली की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। समय रहते कार्रवाई और व्यापक समन्वय से ही इन मरीजों की स्थिति सुधारी जा सकती है।






